राकेश जी (64 वर्ष) की कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी
"पोती ने पूछा — दादू, अब आप हमारे साथ दौड़ते क्यों नहीं?"
मैं 58 साल का रिटायर्ड टीचर हूँ। शुगर को 6 साल हो चुके हैं। दवाई मैंने कभी नहीं छोड़ी — डॉक्टर की हर बात मानी, हर टेस्ट समय पर करवाया।
फिर भी शाम होते-होते शरीर जवाब दे देता था। सीढ़ियाँ चढ़ने में सांस फूलना, खाने के बाद आँखों में भारीपन, और वो थकान जो रातभर सोने के बाद भी नहीं जाती थी।
एक दिन मेरी पोती दौड़ते हुए आई और बोली — "दादू, अब आप हमारे साथ क्यों नहीं दौड़ते?" मेरे पास उस दिन कोई जवाब नहीं था।
उसी हफ़्ते मेरी पत्नी मुझे एक आयुर्वेद विशेषज्ञ के पास ले गई। न कोई चमत्कार का दावा, न दवाई छोड़ने की सलाह — बस एक बात समझाई गई:
"दवाई ब्लड शुगर को मैनेज करने की अपनी भूमिका निभाती है। लेकिन आयुर्वेद में सदियों से ऐसी कई जड़ी-बूटियों का भी वर्णन मिलता है, जिनका उपयोग संतुलित जीवनशैली, पाचन और रोज़मर्रा की तंदुरुस्ती के समर्थन के लिए किया जाता रहा है।"
फिर उन्होंने मुझे Diabosanjivni Capsule के बारे में बताया।